होनहार विद्वान के, होत चीकने गाल
होनहार विद्वान के, होत चीकने गाल जब छोटे बच्चे थे ,तो इस मुहावरे को यह ही मानते थे .प्रभु का दिया हुआ गोरा रंग था गालों का रंग भी सुर्ख लाल था.माँ हमारे रंग रूप पर इठलाती थी.जब भी आईने में चेहरा देखते,लाल-लाल गालों को देख कर बाल मन के अंदर यह बात भर गयी...
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दीपक गर्ग
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[23 Apr 2010 14:40 PM]



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