तुम समन्दर के उस पार से।
तुम समन्दर के उस पार से।जीत लोगे मुझे प्यार से॥मैं तुम्हें देखता ही रहूं, तुम रहो यूं ही सरशार से॥रौज़नों से सुनूंगा सदा, अक्स उभरेगा दीवार से॥इन्तेहा है के इक़रार का, काम लेते हो इनकार से॥गुल-सिफ़त गुल-अदा बाँकपन,जाने-जाँ तुम हो गुलज़ार से॥खे रहा...
[पूरी पोस्ट]
युग-विमर्श
8
0
0
0
2
[23 Apr 2010 13:30 PM]



Shuffle







