शनिचर हरता!

ठिकाना प्रत्येक शनिवारहमारा शनिचर उतारने के लिएमिल जायेगे, हर चौराहे औररेड लाइट परअबोध, बुझे से, गंदे -फटे कपड़े मेंबहुत से बचपन।एक लोटे मेंएक लोहे की मूर्ति ,और थोड़े से कडुवे तेल के साथघूमते यह नन्हेंशनिचर हरता !दीदी, भैया, आंटी कह करप्रगट हो जाते है एक देवता... [पूरी पोस्ट]
writer Pratibha
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[23 Apr 2010 12:43 PM]

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