कॉलेज की लड़कियाँ
हरी-हरी घास के दरीचों परघने-घने पेड़ों के साये मेंबैठी हैं चिड़ियाँजिनका कोई एक ठिकाना नहींएक जगह से उड़कर यहाँ आई हैंयहाँ से उड़कर फिर कहीं जाएँगीहँसी से गूँजतेखुस-फुसाहट और बातों से भरेकोने-कोने को चिरजीवा करअमरता का नया राग गातीकॉलेज की लड़कियाँ....
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अपराजिता
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[23 Apr 2010 10:52 AM]



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