तुम्हारा दर्द

जीवन सन्दर्भ मैं तुम्हारे दर्द मे शामिल हुआ हूं /सच कहूं तो आज कुछ काबिल हुआ हूं //तमाशे इस कदर देखें हैं अपनी जिंदगी में /कि अब जाकर कहीं ग़म के मुकाबिल हुआ हूं //कभी जो फूल खुशियों के खिलें हैं /कभी मैं दर्द की नदिया का इक साहिल हुआ हूं //हमेशा सपन बुनता ही रहा हूं... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह
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[23 Apr 2010 11:26 AM]

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