दुनिया के सात महापाप

हृदयांजलि महर्षि वेदव्यास ने कहा था- परोपकाराय पुण्याय पापाय परपीडनम। आत्मवत सर्वभूतेषु य: पश्यति स पंडित:।। इसी को गोस्वामी तुलसीदास ने कुछ इस तरह से कहा था- परहित सरिस धरम नहीं भाई। परपीड़ा सम नहीं अधमाई।। मतलब परोपकार पुण्य है और दूसरों को कष्ट देना पाप है. यह... [पूरी पोस्ट]
writer Satyajeetprakash
views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
1
[23 Apr 2010 10:45 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix