कहां गये वे गांव

कलम का सिपाही राजेश त्रिपाठीगांव यानी भारत की आत्मा। न जाने कितनी खट्टी-मीठी यादों से जोड़ देता है हमें यह शब्द। यादें खिले कमलों औल पुरइन पात से भरे तालाब की। यादें आम के बोझ से झुकी अमराइयों और कोयल की मीठी कूक की। कजरी का त्योहार, जंगल में आग की लपटों का एहसास देते... [पूरी पोस्ट]
writer Rajesh Tripathi
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[23 Apr 2010 10:42 AM]

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