सीता की अग्नि परीक्षा - युद्धकाण्ड (24)

संक्षिप्त वाल्मीकि रामायण अपने समक्ष सीता को विनयपूर्वक नतमस्तक खड़ा देख रामचन्द्र जी बोले, "भद्रे! रावण से तुम्हें मुक्त कर के मैंने स्वयं के ऊपर लगे कलंक को धो डाला है। शत्रुजनित अपमान और शत्रु दोनों को ही एक साथ मैंने नष्ट कर डाला है। इस समय अपनी प्रतिज्ञा को पूरी करके मैं उसके... [पूरी पोस्ट]
writer जी.के. अवधिया
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[23 Apr 2010 08:52 AM]

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