ग्रहों का प्रभाव सिर्फ मुझे ही नजर क्‍यूं आता है ??

गत्यात्मक ज्योतिष 21 अप्रैल के आलेख में  मैने आनेवाले दो दिनों के लिए लिखा था कि आप संसार के किसी भी शहर में क्‍यूं न हो, उस शहर में सूर्योदय के समय में 5 घंटे 25 मिनट जोड दें। वहां से लेकर सवा दो घंटे तक आप काफी महत्‍वपूर्ण संदर्भों में उलझे रह सकते... [पूरी पोस्ट]
writer संगीता पुरी
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[23 Apr 2010 08:20 AM]

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