बिखर गए तिनकों की तरह ही सपने

दफ़ा-512 सजाना चाहता था एक रिश्तासुंदर सा अपना साबनाना चाहता था एक घौंसलातिनका-तिनका समेट करचाहता था इकट्ठा करनाजिंदगी की सारी यादें इसी मेंचाहता था संजो कर रखनाहर एक पल जिंदगी का मुझ ही मेंचाहता था साथ तुम्हाराअब भी और जिंदगी के बाद भीपरअचानक एक ऐसा तूफान... [पूरी पोस्ट]
writer संजय भास्कर
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[23 Apr 2010 07:03 AM]

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