बिखर गए तिनकों की तरह ही सपने
सजाना चाहता था एक रिश्तासुंदर सा अपना साबनाना चाहता था एक घौंसलातिनका-तिनका समेट करचाहता था इकट्ठा करनाजिंदगी की सारी यादें इसी मेंचाहता था संजो कर रखनाहर एक पल जिंदगी का मुझ ही मेंचाहता था साथ तुम्हाराअब भी और जिंदगी के बाद भीपरअचानक एक ऐसा तूफान...
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संजय भास्कर
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[23 Apr 2010 07:03 AM]



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