तुमने जितनी समझी उससे,मेरी कीमत ज्यादा थी
तुमने जितनी समझी उससे,मेरी कीमत ज्यादा थीजितनी मैंने मांगी थी क्या उतनी मुहब्बत ज्यादा थीहीरे मोती ला पाता, तो शायद तुम मेरे होतेसीमो-ज़र कम थे लेकिन दिल की दौलत ज्यादा थीभूल गया हूँ ज्यादातर पर कुछ लम्हे याद आते हैंमुझसे तुम्हे तकल्लुफ था और गैर से...
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हिमांशु बाजपेयी
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[23 Apr 2010 05:58 AM]



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