हर बार
ऐसा क्यों होता हैकि हर बारमुझे ही हारना होता हैफिर चाहे वहमेरी तरूण अवस्था होया यौवन का मधुमासमेहनत का फलक्यों खट्टा हीपकता है मेरीअम्बुए की डालमेरे सामने हर बार हार ही होती हैजीत से तो वास्तामेरा कभी पड़ा नहींछद्म रूपधारी देवताओं की तरहउसे तुम पहले ही...
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Vimla Bhandari
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[23 Apr 2010 04:44 AM]



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