संघर्ष में भी रोड़े !
जीवन में संघर्ष जिसके हिस्से में आता या तो वह कर ले जाता है या फिर बुजदिलों कि तरह से दुनियाँ छोड़ कर चल देता है. यह मानव जाति के गुण के अनुरूप नहीं है. जीवन एक संघर्ष है और इसको जीत के जाना है. ऐसे ही पुरुषों की सत्ता को चुनौती देती हुई कितनी महिलायें...
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रेखा श्रीवास्तव
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[23 Apr 2010 05:00 AM]



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