खंजर ना दीजिये

शब्द और अर्थ इस अजनबी शहर में घर ना दीजिये , शीशों के बीच हूँ पत्थर ना दीजिये . लेना है इम्तहां तो हैं रास्ते और भी , हादिसों का मौसम है खंजर ना दीजिये . कब मेरी नियत पलट जाये क्या पता , जिन्हें शौके - गुनाह है अवसर ना दीजिये . जो झूठ ही दोहराए मुंसिफ भी यहाँ तो... [पूरी पोस्ट]
writer अतुल प्रकाश त्रिवेदी/ અતુલ પ્રકાશ ત્રિવેદી / অতুল
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[23 Apr 2010 04:36 AM]

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