खेल से दूर सदाबहार खेल
अरविन्द चतुर्वेद :जो खेल होता हुआ दिखता है चाहे वह हॉकी हो या क्रिकेट, उससे अलग एक और सदाबहार खेल चलता रहता है, जो वास्तविक खेलों, उनकी तैयारियों और उनको संचालित-आयोजित करने वाले खेलते रहते हैं। इस सदाबहार खेल के कई रंग हो सकते हैं- पैसे का, भ्रष्टाचारी...
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अरविन्द चतुर्वेद
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[23 Apr 2010 04:15 AM]



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