ये नहीं रुकता तो लगाओ नारे - "जय श्री राम", "अल्लाह हो अकबर"
पिछले कुछ दिनों से ब्लॉग पर घूमाफिरी तो हो रही है किन्तु बहुत कम टिपियाने का मन कर रहा होता है। इसका एक सबसे बड़ा कारण कुछ ढंग का न लिखा जाना है। इस कुछ ढंग का न लिखे जाने जैसी कोढ़ की स्थिति में खाज जैसी हालत ये हो गई कि ब्लॉग पर भी साम्प्रदायिकता दिखाई...
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डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
आक्रोश
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[23 Apr 2010 03:35 AM]



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