अहसान फरामोश सा एक दिन..

मेरे विचार, मेरी कवितायें दिन कभी कभी कितनी बेतरतीब तरीके से शुरू होता है जैसे उसे भी मेरे साथ ही ऑफिस जाना है... मैं तो लेटलतीफ हूँ लेकिन उस कमीने को मुझसे भी जल्दी रहती है... कहने को तो वो मुझसे हमेशा ही पहले उठता है लेकिन हमेशा ही उस एक वाश बेसिन के लिए हम दोनों फाइट करते... [पूरी पोस्ट]
writer Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय)
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[23 Apr 2010 02:52 AM]

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