हाँ आज फिर ये दिल रोया है
लो आज फिर याद आ बैठा,की तू दूर है मुझसे कहीं,इल्म था उसका जो खोया है,हाँ आज फिर ये दिल रोया है.भूलने की नकली कोशिश,हंसी का नकाब ओढ़े चेहरा, गम को बहुत मन मे ढोया है, हाँ आज फिर ये दिल रोया है.बिखरी हुई सी ढेरों आरजू,टूटी सी हजारों...
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हिमांशु पन्त
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[23 Apr 2010 02:38 AM]



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