चर्चा विराम का नुस्खा : अधजल गगरी छलकत जाय

युवा सोच युवा ख्यालात लेखक कुलवंत हैप्पी  यह कहावत तब बहुत काम लगती है, जब खुद को ज्ञानी और दूसरे को मूर्ख साबित करना चाहते हों। अगर आप चर्चा करते हुए थक जाएं तो इस कहावत को बोलकर चर्चा समाप्त भी कर सकते हैं मेरी मकान मालकिन की तरह। जी हाँ, मेरी जब जब भी मेरी मकान मालकिन... [पूरी पोस्ट]
writer Kulwant Happy

कुलवंत हैप्पी

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[23 Apr 2010 02:20 AM]

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