प्रवीण जी, धर्म वही है जिसकी बातें हर युग में प्रासंगिक हों वर्ना वह साधारण ज्ञान है
प्रवीण जी ने कहा:सभी धर्मों के धर्मग्रंथों में बहुत सी ऐसी बातें लिखी गई या बताई गई हैं जो उस युग के मनुष्य की अवैज्ञानिक धारणाओं, सीमित सोच, सीमित ज्ञान (या अज्ञान), तत्कालीन देश-काल की परिस्थितियों व लेखक के अपने अनुभवों या मजबूरियों पर आधारित हैं, आज...
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Shah Nawaz
प्रवीण शाह
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[23 Apr 2010 01:24 AM]



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