मधुकरी

parul chaand pukhraaj kaa..... स्मृतियों में,अपने बचपन से बहुत पीछे…अपनी माँ के बचपन सेयाद आते हैं मुझे कभी- कभी कूड़ी वाले बाबादेखना तो असंभव रहा उन्हेंमगर सुन सुन करजैसे कोई गीत याद हो जाता है, छप जाता है मानस परवैसे ही जाने अनजाने उनका अनदेखा व्यक्तित्व अंकित रहाकहीं अंतस में... [पूरी पोस्ट]
writer पारूल

कूड़ी वाले बाबा

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[23 Apr 2010 00:12 AM]

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