दो बूँद हमें भी दो साकी

नीरव रोशनी की मधुशाला सेदो बूँद हमें भी दो साकीमाना उजियारा है तेरे आँगनतेरे आँगन है दीपों की बारातकवि के मन अंबर में लेकिन तिमिर निशा है बाकीरोशनी की मधुशाला सेदो बूँद हमें भी दो साकीहै याद तुझे तेरे आँगनउजियारे की खातिरमन को जलाकर अपनेराह तुझे दिखलाई थीइस... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. राजेश नीरव
views
15
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
4
[22 Apr 2010 23:18 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix