दो बूँद हमें भी दो साकी
रोशनी की मधुशाला सेदो बूँद हमें भी दो साकीमाना उजियारा है तेरे आँगनतेरे आँगन है दीपों की बारातकवि के मन अंबर में लेकिन तिमिर निशा है बाकीरोशनी की मधुशाला सेदो बूँद हमें भी दो साकीहै याद तुझे तेरे आँगनउजियारे की खातिरमन को जलाकर अपनेराह तुझे दिखलाई थीइस...
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डॉ. राजेश नीरव
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[22 Apr 2010 23:18 PM]



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