हमारे मिथकों में जो नारायणाश्त्र और ब्रह्माश्त्र चलने के वर्णनं हैं वे कहीं........
ईजाफज्जल्लाजोकुल्ल नामक ज्वालामुखी के चलते जो हाय तोबा मची हुई है वह उन ज्वालामुखियो के आगे कुछ भी नहीं है जिनसे मानव प्रजाति के अस्तित्व के सामने ही संकट उत्पन्न हो गया था -कुछ सौ वर्षों पहले १७८३ में लाकी नामक एक ज्वालामुखी ने यूरोप में ही भयानक तबाही...
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Arvind Mishra
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[22 Apr 2010 22:53 PM]



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