प्यार की प्रतिमा

Unmanaa याद के मोती समेटे उर पटल में स्वप्न की डोली उठाने जा रही हूँ ,चरण रज से माँग में सिन्दूर भर करप्यार की प्रतिमा सिराने जा रही हूँ !मैं सुहागन हूँ मगर वह जो सदा से देवता द्वारा उपेक्षित हो रही है,भावना की साधना में निरत शाश्वतछलकती सी नयन निर्झरिणी बही है... [पूरी पोस्ट]
writer Sadhana Vaid
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[22 Apr 2010 22:21 PM]

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