मेरे मन को मैं शब्दों कि भाषा दे दूँ
मेरे मन को मैं शब्दों कि भाषा दे दूँइस नन्हे से चित्त में एक अभिलाषा दे दूँसमझ ना सका किसी बुद्धिजीवी ने जिसेउन इरादों को पखों कि परिभाषा दे दूँ ललक सिखाने कि यूँ तो बड़ी है मेरीसोंच में सबकी है इतनी गन्दगी भारीसोंच ना सका किसी शक्तिशाली ने...
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Vishal Kashyap
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[22 Apr 2010 20:23 PM]



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