‘‘उत्तर आधुनिक विमर्श और समकालीन साहित्य’’

ऋषभ उवाच भूमंडलीकरण, उदारवाद और बाजारवाद के विष्वव्यापी प्रसार के साथ चिंतन और सृजन के क्षेत्र में तीव्रता से बदलाव आए हैं। संस्कृति, समाज, कला और राजनीति आदि सभी क्षेत्रों में लंबे समय तक दो धु्रवीय विचारधाराओं का प्रभाव रहा। बदले हुए संदर्भ में यह बात सामने आई... [पूरी पोस्ट]
writer ऋषभ Rishabha

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[22 Apr 2010 15:35 PM]

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