गोबर का कमाल

Kavya Therapy आधा गाँव — आधा शहर घूमें ढोर — आठों पहर.डाले बाँह — हो निडर.बाँहों में — बेखबर.सुबह शाम — सड़कों पर.घूमें हैं — वधु-वर.निकला बाजू — ट्रक होकर.उछला "छप्प्प"— से गोबर. [उड़न तश्तरी पर सवार श्रीमान समीर लाल जी को समर्पित]समीर सर से एक प्रश्न: यदि कहीं... [पूरी पोस्ट]
writer PRATUL
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[22 Apr 2010 14:49 PM]

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