किसके लिए जीते हैं...

satyadev tripathi मेरी बडी बिटिया जब नन्हीं-सी थी, कोई भी सामान लाते, तो छोटी बहन व भाइयों को दे देती थी। हम कहीं जाते, तो उन दोनो को एक मिनट भी न छोडती - माँ जैसी ‘केयर’ करती। आज वो बडे पद पर काम करती है। आठ-नौ लाख का सालाना पैकेज पाती है। 10-12 लाख का पैकेज दामाद पाता... [पूरी पोस्ट]
writer satyadev tripathi

लघु कहानी

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[22 Apr 2010 11:19 AM]

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