एक सम्वेदना
चढते हुए पारे ने चालीस का स्तर पार कर लिया हैपरिंदे प्यास के मारे दम तोड़ रहे हैं...आइए... अपनी सम्वेदनशीलता को जीवित करेंअपने घर, आँगन, छत, मुंडेर, बाग, बगीचे, कहीं भीएक बरतन में पानी रखेंउन परिंदों के लिए, उनके जीवन के लिएधरोहर हैं ये हमारी......
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SAMVEDANA KE SWAR
गौरैया
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[22 Apr 2010 13:23 PM]



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