किसी दिन कुछ ख़ास हो जाता है ....कुछ परोपकार कर ले मनुआ !

क्वचिदन्यतोअपि..........! जब ऐसे ही हम रोज रोज की सुबह शामों में जिन्दगी  को तमाम  करते होते हैं  किसी दिन कुछ ख़ास हो जाता  है -कुछ यादगार सा! अभी उसी दिन ही तो मुझे एक एस एम् एस मिला और पहली नजर में मैंने उस पर रोजमर्रा की ही तरह सरसरी निगाह डाल कर दीगर... [पूरी पोस्ट]
writer Arvind Mishra
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[22 Apr 2010 13:17 PM]

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