विदेशों में भी बढ़ रहा है पशु धन से प्रेम...!
कुछ समय पूर्व मैंने कहीं पढ़ा था एक बहुत ही तीखा व्यंग्य. शायद किसी ने मुझे एस एम एस भेजा था या मेल. बात आई गयी हो गयी. लिखा था एक आदमी ने एक गाये को देखा और गाये ने आदमी को देखा. आदमी ने उसे देख कर कहा गाये. लेकिन गाये ने आदमी को आदमी नहीं कहा....
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Rector Kathuria
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[22 Apr 2010 13:09 PM]



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