विदेशों में भी बढ़ रहा है पशु धन से प्रेम...!

Punjab Screen कुछ समय पूर्व मैंने कहीं पढ़ा था एक बहुत ही तीखा व्यंग्य. शायद किसी ने मुझे एस एम एस भेजा था या मेल. बात आई गयी हो गयी. लिखा था एक आदमी ने एक गाये को देखा और गाये ने आदमी को देखा. आदमी ने उसे देख कर कहा गाये. लेकिन गाये ने आदमी को आदमी नहीं कहा.... [पूरी पोस्ट]
writer Rector Kathuria

चलते चलते

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[22 Apr 2010 13:09 PM]

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