कुछ मेरी नादानी थी

Jogeshwar Garg कुछ मेरी नादानी थी कुछ उनकी मनमानी थी  अब ग़म हैं पगलाए से तब खुशियाँ दीवानी थी  विरह अगन सा था लेकिन तेरी यादें पानी थी  लगती थी कितनी प्यारी बातें जो बचकानी थी  कभी मिलो तन्हाई में कुछ बातें समझानी थी ... [पूरी पोस्ट]
writer jogeshwar garg

ghazal

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[22 Apr 2010 12:43 PM]

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