‘मै और मेरा समय’
कवितामैमेरा घरकिताबे मेरीमेरे विचारमैं जो सोचता हूंमेरा समयसमय में मैंसमय के बारे मेंमैनें यह लिखा ऐसा लिखा वैसा लिखाउनके बारे में, खिलाफ उनकेलिखा मैंनेस्वार्थ, लोभ, लालच, बाजार,वैश्वीकरण, गरीबी दरिद्रतासबसे पहले मैने ही किये विचारउच्चारे तमाम तमाम...
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कपिलदेव
kavita
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[22 Apr 2010 11:34 AM]



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