किताबों भरी संदूकची महामूर्खराज के हाथ लगा साहित्यिक खजाना

महामूर्खराज की कलम से गर्मी अपने चरम पर जैसे पहुँचने लगी है। दोपहर के भोजन के भोजन के पश्चात इस गर्मी और थकावट से निजात पाने के लिए अभी लेटा ही था की मेरे नौकर लक्षमी ने आ कर कहा मालिक आज ऊपर वाले स्टोर की सफाई कर रहा था तो एक पुरानी  संदूची मिली है जो  कागजो और... [पूरी पोस्ट]
writer महामूर्खराज
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[22 Apr 2010 11:14 AM]

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