हम अपने धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यतों को भी अपने मन कि सुविधा अनुसार छांटने लगे है
अभी ब्लॉग-जगत में ताज़ा-ताज़ा धर्म युद्ध चल रहा था. कुछ लोग बड़ी तैयारी से हिन्दू धर्म-ग्रंथों कि अपनी मनमानी से अनर्गल अर्थ-अनर्थ किये जा रहे थे . और ब्लॉग जगत में उनका जायज विरोध भी हो रहा था, काफी संभव है कि ऐसा उन्होंने किसी सुनियोजित भावनापूर्वक...
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Amit Sharma
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[22 Apr 2010 11:29 AM]



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