तरक्की के नाम पर-हिन्दी शायरी (tarakki ke nam par-hindi shayari)

दीपक भारतदीप की शब्द प्रकाश-पत्रिका अपने घर में जगह नहीं बचीअब परदेस में अपनी दौलत भरने लगे हैं,कहने को तो अपने ही सगे हैं। कमाने के नाम पर लूटा,सारी तिजोरियां भर गयीफिर अपनों से उनका विश्वास भी रूठा,कभी कभी अपने होने का दिखावा वह कर लेते हैं,दान की दलाली के धंधे  मेंसमाज सेवा करते... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

hindi satire poem

views
14
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
1
[22 Apr 2010 10:44 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix