तरक्की के नाम पर-हिन्दी शायरी (tarakki ke nam par-hindi shayari)
अपने घर में जगह नहीं बचीअब परदेस में अपनी दौलत भरने लगे हैं,कहने को तो अपने ही सगे हैं। कमाने के नाम पर लूटा,सारी तिजोरियां भर गयीफिर अपनों से उनका विश्वास भी रूठा,कभी कभी अपने होने का दिखावा वह कर लेते हैं,दान की दलाली के धंधे मेंसमाज सेवा करते...
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दीपक भारतदीप
hindi satire poem
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[22 Apr 2010 10:44 AM]



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