क्या मैं नास्तिक हो गई हूँ
कभी तुम्हे देखा नही था मैंने न कभी देखने की जरुरत ही दिखी 'मेरे मन में तुम्हारे लिए नमन था कब से मैं नही जानती माँ की दिया- बाती में मुझे तुम्हारी रौशनी दिखती थी मंदिर की घंटियों में मैं तुमसे कुछ कहने की धून सुनती थी सारे मंत्रो और श्लोको को रट...
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himani
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[22 Apr 2010 08:44 AM]



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