क्षणिकाएँ... संजीव 'सलिल'
क्षणिकाएँ...संजीव 'सलिल'*कर पाता दिलअगर वंदनातो न टूटतायह तय है.*निंदा करनाबहुत सरल है.समाधान हीमुश्किल है.*असंतोष-कुंठाकब उपजे?बूझे कारण कौन?'सलिल' सियासतस्वार्थ साधतीजनगण रहता मौन.*मैं हूँ अदनाशब्द-सिपाही.अर्थ सहित देंशब्द गवाही..*...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
samyik hindi kavita
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[22 Apr 2010 08:31 AM]



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