तुमको याद ना हो

कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में बहुत मुमकिन है तुमको याद ना हो तुम्हारी डायरी के इक्किस्वे पन्ने पर एक सूखा गुडहल जो तुमने अपने हांथो से लगाया था मेरे जूडे में फिर मान के निशानी दबा दिया डायरी में उसकी साँसे कल तक बाकि थी आज ही दम तोडा है अपने रिश्ते के साथ अब शायद मुझको भी दफ़न कर दोगे... [पूरी पोस्ट]
writer Sonal Rastogi

हिन्दी पोएम

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[22 Apr 2010 05:51 AM]

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