जोगी

दर्पण जोगी राम की अमृत-वाणी रसीली,कर लो पान इसका जोगी रे वो घट-घट वासी सर्वत्र बसे,करो ध्यान उसका जोगी रे बन-बन घूमने से ना मिलेगासबके दिल में बसता जोगी रेजगत के सारे काम हैं झूठे,उसमें क्यों फसता जोगी रे माया के लोभ कारन से ही,रब से विमुखता जोगी रे राम नाम... [पूरी पोस्ट]
writer SURINDER RATTI

भजन

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[22 Apr 2010 06:08 AM]

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