बौनों के बीच महापुरुष

यार कहानी अरविन्द चतुर्वेद :हमारा आचरण इतना क्षुद्रता पूर्ण और व्यक्तित्व इतना बौना होता जा रहा है कि लगता है शायद हम अपने महापुरूषों का सम्मान करने लायक भी नहीं रह गए हैं। कभी राष्ट्रपिता महात्मा गाांधी को पता नहीं क्या समझ कर और किस सनक में खरी-खोटी सुनाई जाती... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द चतुर्वेद
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[22 Apr 2010 05:55 AM]

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