॥ ऐ लड़की॥
(मुंडारी लोकगीत का काव्यांतर : नौ)ऐ लड़की, तेरी मां और चाचियांसरहुल के त्यौहार पर हास-परिहास में लगी हैंपर तू तो घर के पिछवाड़ेगुमसुम खड़ी हैतेरे पिता और चाचा लोग गए हैं अनुष्ठान मेंपर तू तो बाहर, खाई के पास दुबकी पड़ी है।पिछवाड़े खड़ी होऔर छप्पर का पानी तुम...
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अरविन्द चतुर्वेद
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[22 Apr 2010 05:43 AM]



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