इतनी इफ़रात इनायात सुनो ठीक नही
तुकबंदियों के सिलसिले ………एक और सही ***************** ************ ******** ***** **वक़्त-बेवक्त मुलाक़ात सुनो ठीक नही इतनी इफ़रात इनायात सुनो ठीक नही खेल कर तोड़ ही डालोगे ये खिलौना भी ऐसे मासूम ख़यालात सुनो ठीक नही चौथ के चाँद की अब चांदनी भी दुनयावी...
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पारूल
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[22 Apr 2010 05:39 AM]



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