मुर्दो की बस्तीयों में.....
मुर्दो को बस्तीयों में घर हमने बसाया है। जो रूठ कर बैठा है, अपना ही साया है। बहारों की तमन्ना, करते सभी हैं लेकिन- सौंगात को यहाँ पर,कब किसने पाया है। आग सब तरफ है बाहर भी और दिल में, आतिशे मौसम, क्या लौट फिर आया है। मज़हब के नाम पर, होते यहाँ धमाके - या...
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परमजीत बाली
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[22 Apr 2010 01:39 AM]



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