श्रध्धांजली"

रज़िया मिर्ज़ा बस बिल्कुल इसी समय आप हमें छोडकर चली गईं थीं। वक़्त भी यही था। दिन भी यही। अपनी सारी ज़िंदगी हमारे लिये न्यौछावर करदी। अपने लिये तो सोच लेती मेरी "माँ"!!!! हम तीनों बहनों को और भाई को समाज और ज़िंदगी में एक ऐसा मुकाम दिलाया। हमेशाँ बच्चों कि ही फ़िक्र में... [पूरी पोस्ट]
writer रज़िया "राज़"
views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[22 Apr 2010 03:06 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix