आ गगन पर पहुंचा हूँ मैं, घिसने को तारों के कोने..
आज बहुत दिनों बाद आना हुआ. ब्लॉग से कुछ दिनों के लिए नाता ही टूट गया था... पर फिर अचानक एक अंजान दोस्त की मेल आई और खींच लायी मुझे फिर यहीं... एक छोटी सी कल्पना या फिर सच जो भी है? आपकी नज़र है... उम्मीद है पसंद आये... तुम्हारा मीत टिमटिमा पाते नहीं...
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मीत
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[22 Apr 2010 02:26 AM]



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