कमबख्त गर्मी
लोग गर्मी को गरिया रहे हैं कि गर्मी कमबख्त है। गर्मी कहर बरपा रही है। गर्मी ने जीना दूभर कर दिया है। यह एक ऐसी आग बन चुकी है कि कथित ठंडा मतलब कोको-कोला से भी नहीं मिट रही। अरे भाई अब गर्मी है तो है। इसमें कोई क्या कर सकता है? वैसे भी गर्मी में गर्मी ही...
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अंशुमाली रस्तोगी
व्यंग्य
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[22 Apr 2010 01:32 AM]



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