बड़े तूफ़ान देखे हैं
बड़े तूफ़ान देखे हैंअभी तक मैंने राहों मेंकही लालच, कही छलऔर कहीं नफरत निगाहों मेंख़ुशी की ओर जब भीमैंने अपनी बांह फैलाईसिमट आई न जानेसिसकियाँ कितनी पनाहों मेंवो जो ऊँगली उठाते रहते हैंगैरों पे अक्सर हीउन्ही के हाथ देखे हैंसने मैंने गुनाहों मेंकी अब तो...
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ranjana
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[22 Apr 2010 01:03 AM]



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