मेरी साँसों में बहती है........
बहरे मुतदारिक मुसमन मक्तूअ (२२-२२-२२-२२)बेचैनी का ये आलम भी.पागल तुम दीवाने हम भी.प्यार भरे तेरे इस ख़त मेंलफ्ज़ चले आये कुछ नम भी.मेरी साँसों में बहती हैतेरी साँसों की सरगम भी.इक संदूक मिला खुशियों काएक पोटली में कुछ ग़म भी.साथ चले आये बारिश केबीती...
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Ankit Joshi
बहरे मुतदारिक मुसमन मक्तूअ
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[22 Apr 2010 01:11 AM]



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