बाल कविता: संजीव 'सलिल'
बाल कविता: संजीव 'सलिल' अंशू-मिंशू दो भाई हिल-मिल रहते थे हरदम साथ. साथ खेलते साथ कूदते दोनों लिये हाथ में हाथ.. अंशू तो सीधा-सादा था, मिंशू था बातूनी.ख्वाब देखता तारों के, बातें थीं अफलातूनी..एक सुबह दोनों ने सोचा: 'आज करेंगे सैर'.जंगल...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
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[22 Apr 2010 01:27 AM]



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